ऐसा घर जो पिछले 43 दिन से बंद है, माना जाता है कि ऐसे घरों पर भूत कब्जा जमा लेते हैं । ये घर उनका हो जाता है । ऐसे घर में फिर किसी और व्यक्ति का निवास असंभव हो जाता है ।
New Delhi, Feb 10 : भूत-प्रेत, नकारात्मक ऊर्जाओं का ही दूसरा नाम । हमारा वातावरण ऊर्जा का भंडार हे, इसमें नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जा का निरंतर प्रवाह होता रहता है । वातावरण में जब इन दोनों ऊर्जाओं में संतुलन होता है तो सिथति सामान्य रहती है, लेकिन इनमें असंतुलन होते ही स्थिति में उथल-पुथल शुरू हो जाती है । इसी उथल-पुथल में मनुष्य साहस का साथ छोड़ भय से घिरने लगता है । इन सभी परिस्थितियों के लिए आपके घर की दशा और दिशा निर्भर करती है । घर की कुछ विशेष परिस्थितियां हैं जिनमें आपको खास ख्याल रखने की आवश्यकता होती है ।
सूर्य हैं ऊर्जा का स्रोत
हिंदू धर्म शास्त्रों, ज्योतिष,वास्तु में सूर्य को ब्रह्म माना गया है, ये अपार ऊर्जा के स्रोत हैं । पूर्व दिशा से सूर्य का उदय होना और पश्चिम में सूर्य का अस्त होना, इसे नेगेटिव और पॉजिटिव एनर्जी से इस प्रकार जोड़ा गया है । सूर्य जिस दिशा से उगता है अर्थात पूर्व इस दिशा को शुभ और जिस दिशा में डूबते हैं यानी कि पश्चिम इसे अशुभ माना गया है । इस दिशा में पिशाचों को वास माना जाता है ।
अशुभ है दक्षिण-पश्चिम दिशा
जिस प्रकार उत्तर पूर्व दिशा को ईश्वर का स्थान माना गया है उसी प्रकार दक्षिण पश्चिम दिशा पिशाचों, भूतों का निवास मानी गई है । इस दिशा से सदैव नकारात्मक ऊर्जा का गमन होता है । इस दिशा में किए गए कोई भी कार्य आपको भय से भर देते हैं । आपका डर नहीं जाता और आपको हर काम के गलत होने का डर सताने लगता है । ऐसा इस दिशा की नकारात्मकता के कारण होता है ।
इन स्थितियों से बचें
ऐसे घर में जिसमें सूर्य की किरणें प्रवेश ना कर पाती हों, यानी जिस घर में सूरज की रोशनी नहीं पड़ती हो वहां भूतों-प्रेतों का निवास माना जाता है । ऐसे घर में पॉजिटिव एनर्जी का संचार ही नहीं हो पाता । साथ ही वो घर भी जहां सूरज की रोशनी आने में कोई बाधा पहुंच रही हो वहां भी नकारात्मक ऊर्जाओं का वास रहता है, इनसे बचने के लिए घर बनाते हुए सूर्य की रोशनी का ध्यान अवश्य रखें ।
उत्तर पश्चिम दिशा
घर बनाते हुए ध्यान रहे कि आप घर की नॉर्थ वेस्ट दीवार पर खिड़की जरूर बनाएं । इस दिशा से घर में वायु का प्रवेश शुभ माना जाता है । हवा का लगातार प्रवाह घर में सकारातमक ऊर्जा का संचार करता है ।
मंदिर का स्थान – घर का नॉर्थ ईस्ट कोना हमेशा साफ-सुथरा रखें । इस कोने में जमी धूल आपकी जिंदगी को धूल में मिटा सकती है । ऐसे घर ये नेगेटिविटी जाती नहीं है जिसका प्रभाव वहां रह रहे लोगों पर भी पड़ता है ।
43 दिन तक घर बंद रहे तो
ऐसा घर जो पिछले 43 दिन से बंद है, माना जाता है कि ऐसे घरों पर भूत कब्जा जमा लेते हैं । ये घर उनका हो जाता है । ऐसे घर में फिर किसी और व्यक्ति का निवास असंभव हो जाता है । इतने लंबे समय तक बंद घर में दोबारा जाने से पहले हवन-पूजन आवश्यक है । ऐसे घरों में जाना पूरे परिवार के लिए हानिकारक माना जाता है ।
सीलन से बचकर
अकसर घरों में सीलन आदि आ जाती है । मजबूरी वश ऐसे घरों में लोगों को रहना ही पड़ता है । लेकिन सीलन भरे कमरे में रहना Negative एनर्जी को सीधी दावत देने जैसा है । वास्तु में सीलन भरे कमरे को भूत-प्रेतों का डेरा माना जाता है । ऐसा घर जिसमें हर दीवार पर सीलन हो वहां रहना ठीक नहीं । पहले घर की मरम्मत कराकर सीलन को खत्म करें उसके बाद ही घर में रहना शुरू करें ।
श्मशान भूमि
ऐसी जगह जहां कभी किसी की मृत्यु हुई हो या उसे जलाया गया हो ऐसे स्थान पर घर बनाना नकारातमक शक्तियों को उस घर का मेहमान बनाने जैसा है । ऐसे घर में भूत-प्रेतों का निवास स्थान माना गया है । इस जगह पर बनाया हुआ आशियाना आपको कभी शुभ फल और सुकून भरी नींद नहीं देगा । आप यहां बेचैनी ही महसूस करेंगे ।
पीपल या बरगद का पेड़
पीपल और बरगद के पेड़ को हिंदू धर्म शास्त्रों में पूज्यनीय माना गया है । ऐसे पेड़ों को काटकर इनकी जगह पर बनाए गए घरों में पिशाच अपना डेरा जमा लेते हैं । ऐसे घरों में रहना सेहत पर भारी पड़ता है ।
गली का आखिरी घर – जो घर किसी भी गली या कॉलोनी में ऐसी जगह बनाया गया हो जो एकदम आखिर में पड़ता हो या फिर जिसके बाद रास्ता खत्म हो गया हो, वहां पर भी नेगेटिव एनर्जी का संचार होता है । घर बनाने, छोड़ने या बंद करने से पहले इन बातों का ख्याल जरूर रखें